प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज
सुबह अपने पहले जापान दौरे पर रवाना हो गए.
मोदी के इस दौरे से
दोनों देशों को काफी उम्मीदें हैं.
प्रधानमंत्री सीधे जापान
की अध्यात्मिक नगरी कहे जाने
वाले क्योटो शहर पहुंचेंगे.
यहां जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे
खुद मोदी का स्वागत करेंगे.
यहां मोदी रिश्तों की एक नई
परिभाषा लिखेंगे, विकास का नया पैमाना गढ़ेंगे.
भूटान, ब्राजील और नेपाल का दिल
जीतने का बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी आज जापान का दिल जीतने के
लिए जा रहे हैं. पांच दिन की इस यात्रा में
मोदी पुरानी दोस्ती का रंग
और गाढ़ा करेंगे. जापान से एफडीआई दोगुना करने
की कोशिश करेंगे. भारत के पास
जमीन है और जापान के पास
तकनीक. मोदी इसे जोड़कर मेड
इन इंडिया का सपना पूरा करने में कोई कोर कसर
नहीं छोड़ेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने जापान
की जो उड़ान भरी है. ये उड़ान
सिर्फ नरेंद्र
मोदी की ही नहीं,
उनके साथ देश की तमाम
उम्मीदों और संभावनाओं
की भी उड़ान है.
मोदी की जापान यात्रा दोनों देशों के
लिए लिए काफी अहमियत
रखती है. नेपाल और भूटान
की तरह मोदी जापान का दिल
भी जीतना चाहेंगे. जापान के
प्रधानमंत्री शिंजो अबे
को जापानी भाषा में ट्वीट करके
उन्होंने इसकी शुरुआत कर
दी है.
भारत के प्रधानमंत्री और साथ
ही एक दर्जन ने ज्यादा भारतीय
इस्पात, उर्जा और आईटी क्षेत्र के
उद्योगपतियों की आज से क्योटो में शुरू
हो रही यात्रा से जापान और भारत
दोनों को ही काफी कुछ हासिल
करना है. दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-
दूसरे की पूरक हैं, जहां जापान में
संपन्नता और तकनीकी सामर्थ्य
है वहीं भारत में प्राकृतिक संसाधन और
अपनी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने
की क्षमता है.
अभी तक दोनों आपसी हित के
मुद्दों पर ज्यादा कुछ सफलता अर्जित नहीं कर
सकें हैं. इसकी थोड़ी वजह
तो विदेशी निवेश के प्रति भारत
की प्रतिबंधात्मक नीतियां और
थोड़ी वजह यह है
कि जापानी कंपनियों ने अब तक
चीन पर ध्यान केंद्रित कर रखा है. विश्लेषक
मोदी की प्रधानमंत्री शिंजो अबे
से मुलाकात को कुछ महत्वपूर्ण समझौतों के नजरिये से देखते
हैं और परमाणु ऊर्जा उत्पादन प्रौद्योगिकी में
सहयोग के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित
करार की संभावना जताते हैं.
जापान के साथ अत्याधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी में
सहयोग संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
शुक्रवार को कहा कि भारत, जापान के साथ अत्याधुनिक डिफेंस
टेक्नोलॉजी और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग
के नए युग की संभावना देखता है. इसके साथ
ही उन्होंने रेखांकित किया है कि दोनों देशों में
असैन्य परमाणु समझौते व एम्फिबियस विमान (जल-थल
दोनों पर उड़ान भरने वाले) सौदे को लेकर बातचीत
में प्रगति हुई है.
मोदी ने नई दिल्ली में
जापानी मीडिया के साथ चर्चा में
कहा, ‘रक्षा व सुरक्षा के क्षेत्र में, मेरा मानना है कि हमारे
लिए अपने संबंधों को बढ़ाने का समय आ गया है. मैं जापान
की रक्षा निर्यात
नीतियों तथा नियमों में हाल ही के
बदलाव को अत्याधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी व
उपकरण क्षेत्र में सहयोग के नए युग में
बातचीत की संभावना देखता हूं.’
उन्होंने कहा, ‘असैन्य परमाण समुझौते, यूएस-2
एम्फिबियस विमान तथा हाइस्पीड रेलवे पर
हमारी वार्ताओं में उल्लेखनीय
प्रगति हुई है. मुझे उम्मीद है
कि मेरी इस यात्रा से इन क्षेत्रों में मजबूत
सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा.’
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री के
रूप में मोदी भारतीय उप-
महाद्वीप से बाहर आज
अपनी पहली द्विपक्षीय
यात्रा के रूप में जापान जा रहे हैं. इस यात्रा के दौरान दोनों देश
रक्षा, असैन्य परमाणु, ढांचागत विकास और दुर्लभ खनिज के
क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण फैसले
करेंगे. प्रधानमंत्री की पांच
दिवसीय जापान यात्रा से भारत को बहुत
उम्मीदें हैं. मोदी दोनों देशों के
बीच सहयोग के ‘बहुत ठोस एजेंडा’ के साथ
वहां जा रहे हैं.
मुश्किल दौर से बाहर निकली अर्थव्यवस्था,
और सुधार जल्द
प्रधानमंत्री ने शुक्रवार
को कहा कि उनकी सरकार ने 100 दिन के
अपने कार्यकाल में अर्थव्यवस्था को ‘मुश्किल स्थिति’ से
निकाल कर इसमें स्थिरता ला दी है. इसके साथ
ही उन्होंने विदेशी निवेश के
रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर करने
का भी वादा किया.
मोदी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि देश जिस
मुश्किल दौर से गुजर रहा था उससे हम आगे निकल चुके
हैं. इस सरकार के 100 दिन के कार्यकाल में हमने
स्थिरता हासिल की है और जो लगातार गिरावट
का दौर था उसे रोका है.’ जापान की यात्रा से
पहले नई दिल्ली में
जापानी मीडिया से
बातचीत में मोदी ने कहा, ‘हमें
अब रनवे पर आगे बढ़ना है, मुझे पूरा विश्वास है कि बहुत
जल्द हम और नई उंचाईयों पर पहुंचेंगे.’ नरेंद्र
मोदी के नेतृत्व में एनडीए
की नई सरकार ने इस साल 26 मई
को सत्ता संभालने के बाद देश में प्रत्यक्ष
विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने
के लिए कदम उठाए हैं.
Friday, 29 August 2014
5 दिवसीय जापान यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, दोनों देशों की उम्मीदें चरम पर
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